रेखा धस्माना उनियाल – लोकगायिका

उत्तराखण्ड की संस्कृति देश में अपनी खास अहमियत रखती है l यहां के संगीतकारों और गायकों ने देश में अपना खास स्थान बनाया है l इन्ही में से एक हैं उत्तराखण्ड की लोकगायिका और स्वर कोकिला के नाम से प्रसिद्द रेखा धस्माना उनियाल l
“दर्जी दिदा मौकू तू आगणी बणे दे मेरी घाघरी पर चमकदार मगजी लगै दे” जैसे हिट सोंग रेखा धस्माना उनियाल ने गाए हैं l यह गाना जीत सिंह नेगी के द्वारा लिखा गया था l जो कि प्यारी हिंलास कैसेट का गाना है l रेखा धस्माना उनियाल का जन्म रूद्रप्रयाग के जनपद की बचणस्यूं पट्टी के छतोड़ा गाँव में 9 मार्च 1964 में हुआ था l लेकिन जन्म के कुछ सालों में उन्हें अपने पिता के साथ दिल्ली जाना पड़ा. यहां पर रेखा धस्माना उनियाल के पिता बीर अर्जुन प्रेस में काम करते थे. इनकी स्कूल से लेकर कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली में ही हुई l इनका पूरा बचपन शहर में ही गुजरा लेकिन गाँव से दूर होने के बावजूद भी ये अपनी गढ़वाली बोली भाषा में जुड़ी रही और साथ ही ये गायन के क्षेत्र में आगे बढ़ी i इनके घर में गढ़वाली बोली-भाषा, रीति-रिवाज का वातावरण था l जिसका असर बचपन से रेखा के जीवन पर पड़ा. रेखा की गायन प्रतिभा को पहचाना उनके चचेरे भाई सुप्रसिद्ध नाटककार, लेखक, संपादक (दूरदर्शन सामाचार) राजेन्द्र धस्माना ने l
इन्होने अपना पहला गाना स्कूल में शौकिया तौर पर गाया था l लेकिन बडे़ भाई का प्रोत्साहन होने से रेखा की हिम्मत बढ़ी l रेखा धस्माना उनियाल की गायिकी में जुगलबन्दी नये दौर के लोकप्रिय गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के साथ शुरू हुई l यह दौर उत्तराखण्डी गायन, गीत व संगीत का स्वर्ण काल था l नेगी दा के साथ इन्होने ‘‘नयू-नयू ब्यो च ’’,‘‘धरती हमारा गढ़वाल की, ‘‘नारंगी की दाणी, ‘‘ना जा, ना जा तै भ्येलू पाखाड़, जिदेरी घसेरी ’’ आदि अनेक सुपरहिट गीत गाये. रेखा ने उत्तराखण्ड के प्रसिद्द गायकों जैसे चन्द्रसिंह राही, किशन सिंह पंवार, संतोष खेतवाल, देवराज रंगीला, हरीश शर्मा, बीरेन्द्र सिहं नेगी, विजय सकलानी, प्रताप सिहं आदि के साथ गाने गाये l
एकल एलबम में ‘‘जुन्याली रात’’ के गाने पर इन्होने अकेले गाना गाया इस एलबम को भी श्रोताओं ने हाथों-हाथ लिया l “मेरा बाजू रंगा रंग विचारी” गीत रातों-रात लोगों की जुबान पर चढ़ गया l 1988 में रेखा का विवाह राकेश उनियाल के साथ हो गया l वे अपने पति के साथ मुम्बई में चली गई. गीतों का सिलसिला मुम्बई जाकर अब नये स्वरूप में आ गया l गढ़वाली फिल्मों ‘‘बेटी ब्वारी’’, ‘‘बंटवारू’’ और ‘‘मयालू परांण’’ में रेखा ने गायन किया। गढ़वाली व कुमाऊँनी में रेखा जी की 58 कैसेट व डी0वी0डी0 आ चुकी है l उत्तराखण्ड के साथ-साथ पूरे देश में रेखा के 100 से ज्यादा स्टेज शो हो चुके हैं l आकाशवाणी दिल्ली, लखनऊ, नजीबाबाद, दूरदर्शन दिल्ली, लखनऊ व उत्तराखण्ड व कई टेलीविजन चैनलों पर रेखा ने गीत गाये हैं l उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान प्रसिद् जन कवि अतुल शर्मा के साथ ‘‘लड़ के लेंगे, भिड़ के लेंगे, छीन के लेगे उत्तराखण्ड’’ गीत ने आन्दोलन को एक ऐतिहासिक गीत गाये. जिसे लोग आज भी गाते हैं l
इस दौरान देवी प्रसाद सेमवाल जी के गीत ‘‘दीदी भुल्यों, चाची बड्यों, अगने आवा तुम’’ व प्रसिद्व कवि, लेखक, पत्रकार व रेखा के ससुर स्व0 धर्मानन्द उनियाल पथिक का उठा युवा गढ़देश का गीत गाकर रेखा ने अपने सरोकारों के लिए अपना ऐतिहासिक योगदान दिया l हाल ही में रेखा उनियाल ने अपने ससुर ‘पथिक’ के लिखे गीत उत्तराखण्ड दर्शन एलबम को सत्या अधिकारी के साथ गाया l जो उत्तराखण्ड में पहला 23 मिनट का एकल गीत जो 16 छन्दों में है l इस गाने का फिल्मांकन भी किया गया है l यह वीडियो एलबम उत्तराखण्ड कि संस्कृति, परम्परा, दर्शन हेतु यादगार प्रस्तुति है l जिसकी लोग प्रशंसा करते हैं. लोक संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में रेखा लगातार कार्य कर रही है. वे नई पीढ़ी को गीत संगीत का निःशुल्क शिक्षण दे रही है l आकाशवाणी की प्रसिद्ध नाटककार व एंकर रह चुकी माधुरी बड़थ्वाल के साथ मिलकर उत्तराखण्ड की मांगल गीतां की परम्परा को सजाने में लगी हैं l धाद सहित कई सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं से इनको सम्मान मिल चुका है l जिसमें प्रमुख रूप से यूका गोपाल बाबू गोस्वामी लीजेंड्री अवार्ड, यूफा, उफतारा, हिलांस प्रमुख हैं l रेखा को पहाड़ की स्वर कोकिला पहाड़ की लता के नाम से भी जाना जाता है l

source : http://www.samvaad365.com/regional/uttarakhand-folksongs/rekha-dhasmana-uniyal-uttarakhands-number-one-femal-singer/

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