उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद को एक भी रुपया इस दौरान नहीं मिला

जो लोग उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के कामकाज पर विपरीत टिपप्णी कर रहे हैं, उन्हें जानकारी नहीं है कि परिषद को एक भी रुपया इस दौरान नहीं मिला। बिना पैसे के कामकाज कैसे होगा। यह कहना है उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के हटाए गए उपाध्यक्ष हेमंत पांडे का। उन्होंने रविवार को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद को भंग किए जाने पर निराशा जताते हुए कहा कि यह सब एकाएक हुआ है। उन्हें सरकार के इस फैसले पर हैरानी है। अभी कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के फिल्म निर्माता-निर्देशक और कलाकारों का सम्मेलन कराने की औपचारिक सहमति दी थी। साथ ही डाक्यूमेंट्री बनाने का भी योजना थी। एकाएक आए इस फैसले के बाद राजनीति के प्रति उनका विश्वास उठ गया।

उन्होंने कहा कि जहां धन की जरूरत नहीं थी, उस दिशा में परिषद ने बेहतर काम किया। यहां तक कि राज्य सरकार को राजस्व भी दिलाया। संस्कृति, कला जगत को इस फैसले से कोई हैरानी नहीं हुई। संस्कृति और कला से जुड़े ज्यादातर लोग मानो इसके इंतजार में ही बैठे थे।

अब देर सबेर इसके गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही नए उपाध्यक्ष के लिए अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। इस बात की संभावना है कि सरकार जल्द ही अपनी नई फिल्म नीति सामने लाएगी। हाल में नई टिहरी में ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ फिल्म की शूटिंग के अवसर पर जिस तरह मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में फिल्मों में शूटिंग शुल्क न लिए जाने की बात कही, उससे इस दिशा में कोई कदम जल्दी उठाए जाने की उम्मीद जगी है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के समय फिल्म विकास परिषद को जिस तरह आनन-फानन गठित किया गया था, उससे यह शुरू से ही विवादों में रही। तिग्मांशु धूलिया ने परिषद का उपाध्यक्ष बनने में कोई रुझान नहीं दिखाई। बाद में हास्य अभिनेता हेमंत पांडेय को उपाध्यक्ष बनाया गया।

बाद में जय श्रीकृष्ण नौटियाल को भी परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया। परिषद में 15 सदस्य थे। लेकिन परिषद के गठन के साथ ही इसके सदस्यों को लेकर खासी आलोचना हुई। संस्कृति, फिल्म कला, जगत के लोगों ने आक्षेप लगाते हुए कहा था कि परिषद में कुछ ऐसे सदस्य हैं जिनका फिल्म जगत से दूर-दूर का नाता नहीं है। परिषद में फिर श्री कृष्ण नौटियाल को उपाध्यक्ष बनाया गया।

फिल्म परिषद कला जगत को लेकर अनुकूल माहौल नहीं बना पाई। जग्वाल फिल्म के निर्माता और उत्तराखंड फिल्म के पहले निर्माता पाराशर गौड़ का कहना है कि परिषद में लोगों का चयन मानकों पर नहीं किया गया। इसलिए उत्तराखंड में फिल्म और डाक्यूमेंट्री के लिए काम नहीं हो पाया। नाट्यकर्मी लक्ष्मी रावत ने कहा कि आनन फानन में फिल्म परिषद बनाई गई। इससे इसके उद्देश्य पूरे नहीं हुए। यह सब होना ही था। इसे लेकर हैरानी नहीं है। दूसरी तरफ संयोगिता ध्यानी का कहना है कि परिषद हर उस दिशा में प्रयत्नशील थी जिससे उत्तराखंड में फिल्म जगत को बढ़ावा मिले। कोई भी चीज अपना रिजल्ट देने में समय लेती है।

यहां पहले दिन से टिप्पणियां की जाने लगी थीं। उधर हेमंत पांडे का कहना है कि वह इस निर्णय के खिलाफ अदालत में नहीं जाएंगे। उन्होंने राज्य सरकार के फिल्मों से शूटिंग टैक्स न लिए जाने के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही किसी और व्यक्ति को नियुक्त करे, लेकिन फिल्म विकास परिषद का फिर से गठन होना चाहिए।

source: http://www.navodayatimes.in/news/khabre/no-single-penny-has-been-received-by-uttarakhand-film-board/73236/

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